आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८४

वैशम्पाय़न उवाच

ततः पुर्या विनिष्क्रम्य वृष्ण्यन्धकपतिस्तदा |  १५   क
सहितो वसुदेवेन मातुलेन किरीटिनः ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति