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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८४
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः स पुनरावृत्य हय़ः कामचरो वली |  २   क
आससाद पुरीं रम्यां चेदीनां शुक्तिसाह्वय़ाम् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति