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वन पर्व
अध्याय ८४
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वैशम्पाय़न उवाच
स साक्षादेव सर्वाणि शक्रात्परपुरञ्जय़ः |  १३   क
दिव्यान्यस्त्राणि वीभत्सुस्तत्त्वतः प्रतिपत्स्यते ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति