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वन पर्व
अध्याय ८४
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वैशम्पाय़न उवाच
वय़ं तु तमृते वीरं वनेऽस्मिन्द्विपदां वर |  १६   क
अवधानं न गच्छामः काम्यके सह कृष्णय़ा ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति