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उद्योग पर्व
अध्याय ८४
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धृतराष्ट्र उवाच
वृष्ण्यन्धकाः सुमनसो यस्य प्रज्ञामुपासते |  ४   क
आदित्या वसवो रुद्रा यथा वुद्धिं वृहस्पतेः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति