आदि पर्व  अध्याय ६७

दुःषन्त उवाच

आत्मनो वन्धुरात्मैव गतिरात्मैव चात्मनः |  ७   क
आत्मनैवात्मनो दानं कर्तुमर्हसि धर्मतः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति