उद्योग पर्व  अध्याय १५०

जनमेजय़ उवाच

व्यथय़ेय़ुर्हि देवानां सेनामपि समागमे |  ५   क
पाण्डवा वासुदेवश्च विराटद्रुपदौ तथा ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति