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शान्ति पर्व
अध्याय ८५
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वृहस्पतिरु उवाच
सान्त्वमेकपदं शक्र पुरुषः सम्यगाचरन् |  ३   क
प्रमाणं सर्वभूतानां यशश्चैवाप्नुय़ान्महत् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति