अनुशासन पर्व  अध्याय ८५

वसिष्ठ उवाच

एतस्मात्कारणादाहुरग्निं सर्वास्तु देवताः |  २०   क
ऋषय़ः श्रुतसम्पन्ना वेदप्रामाण्यदर्शनात् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति