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अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
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अग्निरु उवाच
ददाति पश्चिमां सन्ध्यां यः सुवर्णं धृतव्रतः |  ६२   क
व्रह्मवाय़्वग्निसोमानां सालोक्यमुपय़ाति सः ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति