वन पर्व  अध्याय २७८

नारद उवाच

नान्यस्मिन्पुरुषे सन्ति ये सत्यवति वै गुणाः |  २९   क
प्रदानमेव तस्मान्मे रोचते दुहितुस्तव ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति