आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८५

वैशम्पाय़न उवाच

वार्यमाणास्तु पार्थेन सान्त्वपूर्वममर्षिताः |  ४   क
परिवार्य हय़ं जग्मुस्ततश्चुक्रोध पाण्डवः ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति