वन पर्व  अध्याय ३६

भीमसेन उवाच

अश्रौषीस्त्वं राजधर्मान्यथा वै मनुरव्रवीत् |  २०   क
क्रूरान्निकृतिसंय़ुक्तान्विहितानशमात्मकान् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति