वन पर्व  अध्याय ८५

वैशम्पाय़न उवाच

व्राह्मणानुमतान्पुण्यानाश्रमान्भरतर्षभ |  २   क
दिशस्तीर्थानि शैलांश्च शृणु मे गदतो नृप ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति