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वन पर्व
अध्याय ८५
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वैशम्पाय़न उवाच
तिसृष्वन्यासु पुण्यानि दिक्षु तीर्थानि मे शृणु |  २३   क
सरितः पर्वतांश्चैव पुण्यान्याय़तनानि च ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति