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उद्योग पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
तथा राज्ञो दन्तवर्णा वृहन्तो; रथे युक्ता भान्ति तद्वीर्यतुल्याः |  १३   क
ऋश्यप्रख्या भीमसेनस्य वाहा; रणे वाय़ोस्तुल्यवेगा वभूवुः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति