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द्रोण पर्व
अध्याय ८५
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सञ्जय़ उवाच
यः स धर्मः पुरा दृष्टः सद्भिः शैनेय़ शाश्वतः |  ४१   क
साम्पराय़े सुहृत्कृत्ये तस्य कालोऽय़मागतः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति