menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
परित्यज्य प्रिय़ान्प्राणान्रणे विचर वीरवत् |  ९५   क
न हि शैनेय़ दाशार्हा रणे रक्षन्ति जीवितम् ||  ९५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति