आदि पर्व  अध्याय ८६

यय़ातिरु उवाच

आहूताध्याय़ी गुरुकर्मस्वचोद्यः; पूर्वोत्थाय़ी चरमं चोपशाय़ी |  २   क
मृदुर्दान्तो धृतिमानप्रमत्तः; स्वाध्याय़शीलः सिध्यति व्रह्मचारी ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति