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आदि पर्व
अध्याय ८६
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यय़ातिरु उवाच
रात्र्या यय़ा चाभिजिताश्च लोका; भवन्ति कामा विजिताः सुखाश्च |  ६   क
तामेव रात्रिं प्रय़तेत विद्वा; नरण्यसंस्थो भवितुं यतात्मा ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति