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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८६
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वैशम्पाय़न उवाच
अन्तःपुराणि राज्ञां च नानादेशनिवासिनाम् |  १५   क
कारय़ामास धर्मात्मा तत्र तत्र यथाविधि ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति