वन पर्व  अध्याय ८६

धौम्य उवाच

वेदी शूर्पारके तात जमदग्नेर्महात्मनः |  ९   क
रम्या पाषाणतीर्था च पुरश्चन्द्रा च भारत ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति