उद्योग पर्व  अध्याय ८६

वैशम्पाय़न उवाच

स यद्व्रूय़ान्महावाहुस्तत्कार्यमविशङ्कय़ा |  १०   क
वासुदेवेन तीर्थेन क्षिप्रं संशाम्य पाण्डवैः ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति