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कर्ण पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
स राजमध्ये पुरुषप्रवीरो; रराज जाम्वूनदचित्रवर्मा |  ९९   क
पद्मप्रभो वह्निरिवाल्पधूमो; मेघान्तरे सूर्य इव प्रकाशः ||  ९९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति