भीष्म पर्व  अध्याय ८६

सञ्जय़ उवाच

वाय़ुवेगसमस्पर्शा जवे वाय़ुसमांस्तथा |  २३   क
आरुह्य शीलसम्पन्नान्वय़ःस्थांस्तुरगोत्तमान् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति