उद्योग पर्व  अध्याय १७२

भीष्म उवाच

नास्मि प्रीतिमती नीता भीष्मेणामित्रकर्शन |  ९   क
वलान्नीतास्मि रुदती विद्राव्य पृथिवीपतीन् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति