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भीष्म पर्व
अध्याय ८६
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सञ्जय़ उवाच
वाढमित्येवमुक्त्वा तु राक्षसो घोरदर्शनः |  ४८   क
प्रय़यौ सिंहनादेन यत्रार्जुनसुतो युवा ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति