द्रोण पर्व  अध्याय ८६

सञ्जय़ उवाच

स त्वमद्य महावाहो प्रिय़ार्थं मम माधव |  २०   क
जय़ार्थं च यशोर्थं च रक्ष राजानमाहवे ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति