द्रोण पर्व  अध्याय ८६

सञ्जय़ उवाच

मा च ते भय़मद्यास्तु राजन्नर्जुनसम्भवम् |  २७   क
न स जातु महावाहुर्भारमुद्यम्य सीदति ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति