आदि पर्व  अध्याय १९६

द्रोण उवाच

ममाप्येषा मतिस्तात या भीष्मस्य महात्मनः |  २   क
संविभज्यास्तु कौन्तेय़ा धर्म एष सनातनः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति