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द्रोण पर्व
अध्याय ८६
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युधिष्ठिर उवाच
केकय़ा भ्रातरः पञ्च राक्षसश्च घटोत्कचः |  ४४   क
विराटो द्रुपदश्चैव शिखण्डी च महारथः ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति