आदि पर्व  अध्याय ८७

अष्टक उवाच

तांस्ते ददामि मा प्रपत प्रपातं; ये मे लोका दिवि राजेन्द्र सन्ति |  १०   क
यद्यन्तरिक्षे यदि वा दिवि श्रिता; स्तानाक्रम क्षिप्रममित्रसाह ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति