आदि पर्व  अध्याय ८७

प्रतर्दन उवाच

तांस्ते ददामि मा प्रपत प्रपातं; ये मे लोकास्तव ते वै भवन्तु |  १५   क
यद्यन्तरिक्षे यदि वा दिवि श्रिता; स्तानाक्रम क्षिप्रमपेतमोहः ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति