अनुशासन पर्व  अध्याय ८७

युधिष्ठिर उवाच

चातुर्वर्ण्यस्य धर्मात्मन्धर्मः प्रोक्तस्त्वय़ानघ |  १   क
तथैव मे श्राद्धविधिं कृत्स्नं प्रव्रूहि पार्थिव ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति