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द्रोण पर्व
अध्याय ८७
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सञ्जय़ उवाच
ते न क्षता न च श्रान्ता दृढावरणकार्मुकाः |  २५   क
मदर्थं विष्ठिता नूनं धार्तराष्ट्रस्य शासनात् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति