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द्रोण पर्व
अध्याय ८७
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सञ्जय़ उवाच
ते च सर्वेऽनुसम्प्राप्ता मम नाराचगोचरम् |  ४०   क
न विमोक्ष्यन्ति कौन्तेय़ यद्यपि स्युर्मनोजवाः ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति