अनुशासन पर्व  अध्याय १

भीष्म उवाच

गौतमी नाम कौन्तेय़ स्थविरा शमसंय़ुता |  १०   क
सर्पेण दष्टं स्वं पुत्रमपश्यद्गतचेतनम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति