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आदि पर्व
अध्याय ८८
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं राजा स महात्मा ह्यतीव; स्वैर्दौहित्रैस्तारितोऽमित्रसाहः |  २६   क
त्यक्त्वा महीं परमोदारकर्मा; स्वर्गं गतः कर्मभिर्व्याप्य पृथ्वीम् ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति