शान्ति पर्व  अध्याय ८८

भीष्म उवाच

यो राष्ट्रमनुगृह्णाति परिगृह्य स्वय़ं नृपः |  २०   क
सञ्जातमुपजीवन्स लभते सुमहत्फलम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति