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शान्ति पर्व
अध्याय ८८
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भीष्म उवाच
ग्रामे यान्ग्रामदोषांश्च ग्रामिकः परिपालय़ेत् |  ४   क
तान्व्रूय़ाद्दशपाय़ासौ स तु विंशतिपाय़ वै ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति