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शान्ति पर्व
अध्याय ८८
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भीष्म उवाच
सोऽपि विंशत्यधिपतिर्वृत्तं जानपदे जने |  ५   क
ग्रामाणां शतपालाय़ सर्वमेव निवेदय़ेत् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति