अनुशासन पर्व  अध्याय १३३

उमो उवाच

केन कर्मविपाकेन प्रज्ञावान्पुरुषो भवेत् |  ४४   क
अल्पप्रज्ञो विरूपाक्ष कथं भवति मानवः |  ४४   ख
एतं मे संशय़ं छिन्द्धि सर्वधर्मविदां वर ||  ४४   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति