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अनुशासन पर्व
अध्याय ८८
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भीष्म उवाच
आपो मूलं फलं मांसमन्नं वापि पितृक्षय़े |  १५   क
यत्किञ्चिन्मधुसंमिश्रं तदानन्त्याय़ कल्पते ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति