आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८८

वैशम्पाय़न उवाच

उपय़ाता नरव्याघ्रा य इमे जगदीश्वराः |  २   क
एतेषां क्रिय़तां पूजा पूजार्हा हि नरेश्वराः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति