वन पर्व  अध्याय ८८

धौम्य उवाच

सरस्वती पुण्यवहा ह्रदिनी वनमालिनी |  २   क
समुद्रगा महावेगा यमुना यत्र पाण्डव ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति