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उद्योग पर्व
अध्याय ८८
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वैशम्पाय़न उवाच
राजा सर्वगुणोपेतस्त्रैलोक्यस्यापि यो भवेत् |  २१   क
अजातशत्रुर्धर्मात्मा शुद्धजाम्वूनदप्रभः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति