उद्योग पर्व  अध्याय ८८

वैशम्पाय़न उवाच

पक्ष्मसम्पातजे काले नकुलेन विनाकृता |  ४१   क
न लभामि सुखं वीर साद्य जीवामि पश्य माम् ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति