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उद्योग पर्व
अध्याय ८८
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वैशम्पाय़न उवाच
ये ते वाल्यात्प्रभृत्येव गुरुशुश्रूषणे रताः |  ५   क
परस्परस्य सुहृदः संमताः समचेतसः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति