उद्योग पर्व  अध्याय ८८

वैशम्पाय़न उवाच

पूर्वैराचरितं यत्तत्कुराजभिररिन्दम |  ५५   क
अक्षद्यूतं मृगवधः कच्चिदेषां सुखावहम् ||  ५५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति