उद्योग पर्व  अध्याय ८८

वैशम्पाय़न उवाच

व्रूय़ा माधव राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |  ७२   क
भूय़ांस्ते हीय़ते धर्मो मा पुत्रक वृथा कृथाः ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति